
रात १२ बजे उड़नतश्तरी का नाम सुनकर मैं भी सहम गया। दरशल, मेरे रिपोर्टिंग टीम के साथी राहुल पाण्डेय का फोन आया कि आसमान में कुछ अजीब वस्तु दिखाई दे रही है, पहले तो मुझे भी भरोसा नही हुआ। लेकिन फ़िर भी मैं और मेरे दो साथी अनुराग और आई नेक्स्ट के फोटोग्राफर सुनील कैथ्वाश बाहर निकले तो कुछ नजर नही आया। बाद में हम जागरण ऑफिस की बिल्डिंग पर चढ़ गए। दक्षिण दिशा में एक चमकीली आकर्ती ने सबको विस्मित कर दिया। एक वस्तु थी जो रंग-बिरंगे नजारों के साथ पल-पल में जगह बदल रही थी। यकीनन ऐसा पहले मैंने कभी नही देखा था। तुंरत-फुरत अपने बॉस को बताया कैमरे से खिची गई फोटो दिखाई तो वेह भी चोंक पड़े। एडिसन तैयार था। इसी ख़बर को लीड बनाने का फ़ैसला हुआ। रिपोर्टरों को जगाया गया कुछ विज्ञानियों के वर्जन लिए गए। १५ मिनट के अन्दर ख़बर को लीड बना दिया गया। अगले दिन लोगों का चोंकना लाजिमी था। क्योकि ये ख़बर हमारे यहाँ एक्सक्लूसिव थी। किसी और अखबार को कानोकान ख़बर तक नही हुयी। हमने सोचा था कल सुबह हमारी पीठ थपथपाई जायेगी मगर ऐसा नही हुआ। अगले दिन ख़बर को दैनिक जागरण के ३५ संस्करण में छापने का निर्णय हुआ। साथ ही नासा ने इस खगोलीय घटना का संज्ञान लिया और इसके ओरिजनल फोटो आई नेक्स्ट से लिए। नासा ने इस घटना को अपने यहाँ रजिस्टर किया। जिसपर दुनियाभर के विज्ञानी खोज कर सकते हैं।

7 टिप्पणियाँ:
चौंकाने वाली तस्वीर है.
वाह भई ये तो बिल्कुल नई बात है। क्योंकि इससे पहले दिल्ली के इतने आसपास ऐसी चीजें नहीं देखी गई हैं। क्या ये तस्वीर सही है? यदि ये ही तो सच दंग कर देने वाली है।
सचमुच चौकाने वाली तस्वीर है -यह है क्या ?यू ऍफ़ ओ ही है न !पर विचित्राकृति ufo .
आश्चर्यजनक!
तस्वीर उडन तश्तरी की नहीँ लगती। यह अंतरिक्ष से वायु मंडल में प्रवेश करते किसी मलबे की हो सकती है जो किसी हल्की गैस में परिवर्तित हो कर जल रहा हो। यदि ऐसा है तो उस का निशान भी नहीं मिलेगा।
भाई हम तो शीर्षक देख कर समझे थे की कहीं
हमारे गुरुदेव समीर भाई की उड़नतश्तरी का कोई
लेख होगा पर यहाँ तो माजरा आश्चर्यजनक है !
बात द्विवेदी जी की भी सही हो सकती है ! चाहे
यु. ऍफ़. ओ. हो चाहे कुछ और पर तस्वीर
शानदार है !
ज़नाब ये कोई यूएफओ या उड़न तश्तरी नही थी। नासा और आर्मी बेस भी इसकी पुष्टि कर चुका है। हालाँकि इस से पहले एक बार यूएफओ आगरा के पास देखा जा चुका है।
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